आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ में अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने अभिनय में आने के अनुभव और किरदार की तैयारी पर बात की। मुकेश तिवारी ने फिल्म की कहानी, मेथड एक्टिंग और सिमाला प्रसाद के परफॉर्मेंस पर विचार साझा किए। दोनों कलाकारों ने फिल्म की सोच, शूटिंग के अनुभव और सिनेमा के सामाजिक प्रभाव पर भी बात की। सवाल: आप एक IPS अधिकारी हैं, ऐसे में फिल्मों में आने का फैसला कैसे हुआ? यह फिल्म आपको कैसे ऑफर हुई? जवाब/सिमाला प्रसाद: मैंने पहले भी थिएटर किया है और कुछ रोल निभाए हैं। फिल्म की शूटिंग मध्य प्रदेश में होनी थी और इसमें पुलिस अधिकारी का किरदार था। फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित है और एक बड़े सामाजिक मुद्दे को उठाती है। इसकी कहानी और प्रस्तुति मुझे आकर्षक लगी। इसलिए मैंने इसका हिस्सा बनने का फैसला किया। सवाल: क्या आपके रियल लाइफ अनुभव इस किरदार को निभाने में काम आए? जवाब/सिमाला प्रसाद: रियल लाइफ और किरदार निभाना अलग बातें हैं। असल जिंदगी में मैं आईपीएस अधिकारी हूं, लेकिन फिल्म के किरदार की अपनी यात्रा और भावनाएं हैं। उसके अपने सपने, संघर्ष और अनुभव हैं। यह समझना कि वह किन परिस्थितियों से गुज़री है और किसी स्थिति पर वैसी प्रतिक्रिया क्यों देती है, मेरे लिए सबसे बड़ा चैलेंज था। सवाल: पुलिस सेवा और एक्टिंग, दोनों ही चुनौतीपूर्ण क्षेत्र हैं। आपको किसमें ज्यादा चुनौती महसूस हुई? जवाब/सिमाला प्रसाद: हर काम अपने आप में चुनौतीपूर्ण होता है। हर क्षेत्र में मेहनत, अध्ययन और तैयारी की जरूरत होती है। पुलिस अधिकारी के तौर पर हर दिन नए चैलेंज लेकर आता है। वहीं एक एक्ट्रेस के रूप में ऐसे व्यक्ति का किरदार निभाना होता है, जिसकी जिंदगी आपने कभी नहीं जी होती। इसलिए दोनों क्षेत्रों में तैयारी और समर्पण जरूरी है। सवाल: मुकेश तिवारी जैसे अनुभवी अभिनेता के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब/सिमाला प्रसाद: शुरुआत में स्वाभाविक रूप से घबराहट थी। तैयारी पूरी थी, लेकिन शूटिंग को लेकर अनिश्चितता थी। शूटिंग शुरू होने के बाद सह-कलाकारों से काफी सहयोग मिला। उनके सकारात्मक रवैये और समर्थन ने बेहतर प्रदर्शन में मदद की। सवाल: मुकेश जी, आपने कई यादगार किरदार निभाए हैं। इस फिल्म में ऐसा क्या है जो दर्शकों को चौंकाएगा? जवाब (मुकेश तिवारी): इस फिल्म में मैंने दर्शकों को चौंकाने की अलग कोशिश नहीं की। जो किरदार लिखा गया, उसे सादगी और ईमानदारी से निभाया। अपने अनुभव या स्टारडम का बोझ किरदार पर नहीं डाला। चरित्र को समझकर सच्चाई के साथ पेश करने की कोशिश की। सवाल: जब आपको फिल्म का ऑफर मिला तो सबसे पहले किस बात ने प्रभावित किया? जवाब/मुकेश तिवारी: मुझे इसकी कहानी ने प्रभावित किया। यह किसी की पीड़ा का महिमामंडन नहीं करती, बल्कि एक यात्रा दिखाती है। फिल्म जजमेंटल नहीं होती। इसमें कई कहानियां साथ चलती हैं और अंत में एक बिंदु पर मिलती हैं। यही इसकी खूबसूरती है। सवाल: जब आपको पता चला कि फिल्म में आईपीएस अधिकारी सिमला प्रसाद भी एक्टिंग कर रही हैं, तब आपकी प्रतिक्रिया क्या थी? जवाब/मुकेश तिवारी: हमारी मुलाकात शूटिंग के दौरान हुई थी। शुरुआत में मन में सवाल था कि एक आईपीएस अधिकारी अभिनय कैसे करेंगी। यह स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। साथ काम करने के बाद मेरी राय बदल गई। वे सीखने के लिए हमेशा तैयार थीं और अभिनय सहजता से कर रही थीं। बाद में लगा कि उन्हें पहले जज करना मेरी गलती थी। सवाल: क्या आपको लगता है कि ‘द नर्मदा स्टोरी’ सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक संवाद भी शुरू करेगी? जवाब/मुकेश तिवारी: मनोरंजन और संवाद एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। यह फिल्म भाषण देने या दर्शकों को बोझिल करने की कोशिश नहीं करती। यह एक कहानी है, जिसे स्वाभाविक रंगों के साथ पेश किया गया है। गंभीर कहानी का अपना मनोरंजन भी होता है। दर्शक इसे संवेदनशील और ईमानदार कहानी के रूप में देखेंगे। सवाल: मेथड एक्टिंग को लेकर काफी चर्चा होती है। आप इसे किस तरह देखते हैं? जवाब/मुकेश तिवारी: मेथड एक्टिंग कोई फॉर्मूला नहीं, बल्कि अभ्यास की प्रक्रिया है। जैसे गायक रियाज करता है और नर्तक अभ्यास करता है, वैसे ही अभिनेता की भी तैयारी होती है। हर कलाकार की अपनी पद्धति होती है। सिर्फ तैयारी काफी नहीं, अंत में क्राफ्ट के साथ प्रदर्शन भी करना होता है। सवाल: सिमला जी, आपने अपने किरदार के लिए किस तरह तैयारी की? जवाब/सिमला प्रसाद: सबसे पहले मैंने स्क्रिप्ट को समझा। फिर निर्देशक और लेखक से बातचीत कर किरदार की पृष्ठभूमि जानी। मैंने समझने की कोशिश की कि ऐसे माहौल से आई लड़की का स्वभाव और सोच कैसी होगी। इसी आधार पर किरदार को समझने और निभाने की कोशिश की। सवाल: शूटिंग के दौरान ऐसा कौन-सा पल था, जो आज भी आपको याद है? जवाब/सिमाला प्रसाद: ऐसे कई पल हैं, लेकिन लॉकअप वाला एक सीन हमेशा याद रहेगा। पूछताछ के दौरान मुकेश जी को जोरदार थप्पड़ पड़ता है। सीन के बाद पूरे सेट पर कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया था। सभी लोग रुक गए थे। वह पल काफी प्रभावशाली था। सवाल: एक महिला आईपीएस अधिकारी होने के नाते, क्या आपको लगता है कि सिनेमा समाज में बदलाव ला सकता है? जवाब/सिमाला प्रसाद: बिल्कुल। सिनेमा एक शक्तिशाली माध्यम है। इसकी सबसे बड़ी ताकत है कि यह ऑडियो-विजुअल रूप में बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचता है। कई बार पर्दे पर देखी बातें हमारे मन में ज्यादा गहराई से दर्ज हो जाती हैं। इसलिए समाज पर सिनेमा का प्रभाव बड़ा होता है।
आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद बनीं एक्ट्रेस: मुकेश तिवारी बोले- लगा था ये कैसे एक्टिंग करेंगी, लेकिन उन्हें जज करना मेरी गलती थी
आईपीएस अधिकारी सिमाला प्रसाद फिल्म ‘द नर्मदा स्टोरी’ में अहम भूमिका निभाती नजर आएंगी। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने अभिनय में आने के अनुभव और किरदार की तैयारी पर बात की। मुकेश तिवारी ने फिल्म की कहानी, मेथड एक्टिंग और सिमाला प्रसाद के परफॉर्मेंस पर विचार साझा किए। दोनों कलाकारों ने फिल्म की सोच,…

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